त्रिकोणासन करने की प्रायोगिक विधि और इससे लाभ
त्रिकोणासन करने से पहले सावधानियां - (1) उत्तर की ओर सिर करके त्रिकोणासन ना लगाएं। (2) आसन लगाते समय अपनी टांगों को ताने रखें, ये दो खास सावधानियां इस असं में रखने की जरूरत है।
त्रिकोणासन करने से पहले सावधानियां - (1) उत्तर की ओर सिर करके त्रिकोणासन ना लगाएं। (2) आसन लगाते समय अपनी टांगों को ताने रखें, ये दो खास सावधानियां इस असं में रखने की जरूरत है।
इसका वास्तविक लाभ मानसिक है। इसमें ध्यान लगाने से मानसिक शांति मिलती है । दृष्टि तीक्ष्ण होती है । त्राटक बिंदु में प्रकाश भरता है। कहा जाता है कि भगवान शंकर ने इसी मुद्रा में ध्यान लगाकर अपने तीसरे नेत्र को महाशक्तिमान बनाया था। इसीलिए यह आसन चमत्कारिक शक्तियों को प्रदान करने वाला है त्राटक बिंदु के खुलने पर दृष्टि का भाव बाहरी संसार पर प्रभाव डालने लगता है।
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Women suffer |
यदि मन की शुद्धि नहीं हुई, तो शरीर में विषाक्त तत्व बनते रहेंगे। आप उसे व्यायाम के द्वारा ठेल कर बाहर निकालते रहेंगे। व्यर्थ ही जीवन भर श्रम करते रहना होगा । इसमें आपको मानसिक शांति, उत्साह, उल्लास, आदि केवल आसन के अभ्यास से नहीं मिल पाएगा । मस्तिष्क का क्षेत्र 'ध्यान' का है। ध्यान लगाकर ही आप शारीरिक एवं मानसिक स्वस्थता को प्राप्त कर सकते हैं। सांसारिक मामलों की सफलता में भी यह आपको सहायता देगा ।
गोरक्षासन से लाभ - गोरक्षासन के अभ्यास से शुक्र ग्रंथियों का व्यायाम होता है। इससे पुरुषों के शुक्राणुओं की क्षमता बढ़ती है। वीर्य वृद्धि एवं वीर्य के गाढ़ेपन में लाभ मिलता है। यह आसन स्वप्नदोष एवं शीघ्रपतन के दोष से मुक्त करता है। मूत्र संबंधी दोष एवं आंत और पेट से संबंधित रोग (बदहजमी, कब्ज, गैस आदि) दूर होते हैं। कंधे पुष्ट होते हैं।बाजुओं की आकृति और बनावट देखते बनती है। पैरों की नसें और पेशियां मजबूत एवं लचीली होती हैं।
महिलाओं को उपर्युक्त शारीरिक लाभ तो होता ही है, मासिक धर्म, रज एवं गर्भाशय के दोष भी दूर होते हैं। जंघाओं एव वक्षों की सुडौलता बनती है। बाजू मजबूत होते है। कमर दर्द और ल्यूकोरिया में भी इससे लाभ होता है।
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Plants in hand |